
शीर्षक: माँ स्कन्दमाता, मेरे दिल की पुकार सुन ले [धीमा हारमोनियम, एकल पुरुष स्वर] माँ स्कन्दमाता, मेरे दिल की पुकार सुन ले, आँखों में छिपे आँसू, मेरी सरकार सुन ले। दुनिया की भीड़ में मन अकेला हो गया, तेरे दर पर आकर मेरा दिल तेरा हो गया। मुखड़ा ओ माँ, मेरी माँ, मेरी विनती स्वीकार कर, मेरे सूने जीवन में प्रेम का संचार कर। तेरी ममता की छाया मेरे सिर पर बनी रहे, मेरे घर में सदा सुख-शांति की रोशनी रहे। अंतरा 1 जब रात अँधेरी हो और राह नज़र न आए, जब मन की बेचैनी किसी से कही न जाए, तब तेरी तस्वीर के आगे सिर झुकाता हूँ, अपने टूटे हुए सपनों को तुझको सुनाता हूँ। न जाने कितने प्रश्न मेरे मन में पलते हैं, न जाने कितने आँसू चुपचाप निकलते हैं। माँ, मुझे धीरज देना, सही राह दिखाना, मेरे मन में विश्वास का दीप जलाना। मुखड़ा ओ माँ, मेरी माँ, मेरी विनती स्वीकार कर, मेरे सूने जीवन में प्रेम का संचार कर। तेरी ममता की छाया मेरे सिर पर बनी रहे, मेरे घर में सदा सुख-शांति की रोशनी रहे। अंतरा 2 कमल के आसन पर तेरा रूप निराला, तेरी करुणा से जग ने प्रेम सँभाला। गोदी में बाल स्कन्द, मुख पर उजियारा, तेरी ममता ने भक्तों को दिया सहारा। तेरे चरणों में झुककर यही माँगता हूँ, मन के अहंकार को दूर करने की प्रार्थना करता हूँ। मेरे शब्दों में मिठास, कर्मों में सच्चाई हो, मेरे जीवन में सेवा और भलाई हो। रूहानी आलाप ओ माँऽऽ… मेरी माँऽऽ… तेरे दर पे मेरा प्रणाम… ओ स्कन्दमाता… सुन ले भक्त का पैगाम… अंतरा 3 जब किसी गरीब के घर में चूल्हा न जलता हो, जब कोई बच्चा दुख में चुपचाप मचलता हो, जब कोई बूढ़ा राह में सहारे को तरसे, माँ, करुणा जागे और कोई उसका हाथ धरे। मुझे इतना सामर्थ्य और सद्बुद्धि देना, दुखियों के आँसू पोंछने की शक्ति देना। मैं किसी के दर्द को कभी छोटा न समझूँ, किसी मजबूर को देखकर मुँह न फेरूँ। हल्की कव्वाली की ताल जय माँ, जय माँ, स्कन्दमाता जय माँ, तेरे नाम से मन को मिले सच्चा आराम। जय माँ, जय माँ, जगदम्बे जय माँ, तेरे चरणों में झुकता है सारा जहान। अंतरा 4 न सोने की चाहत, न चाँदी की तमन्ना, बस मन में रहे तेरे प्रेम का उजाला। मेरे परिवार को प्रेम से जोड़े रखना, हर रिश्ते में विश्वास को बनाए रखना। कभी क्रोध में आकर किसी का दिल न दुखाऊँ, कभी स्वार्थ में आकर अपना धर्म न भुलाऊँ। मेरी वाणी में सच्चाई, हृदय में दया रहे, मेरे जीवन में तेरी भक्ति की धारा बहे। अंतरा 5 माँ, जो अपने घर से दूर उदास बैठे हैं, जो यादों के सागर में रात-दिन रहते हैं, उनके मन में उम्मीद की किरण जगा देना, उनके जीवन में फिर मुस्कान सजा देना। जो बीमारी या परेशानी से घबराते हैं, जो अपने भविष्य को लेकर चिंता में डूब जाते हैं, उन सबको धैर्य और उचित सहारा मिले, हर मुश्किल में उन्हें सही किनारा मिले। मुखड़ा — भावपूर्ण स्वर ओ माँ, मेरी माँ, मेरी विनती स्वीकार कर, मेरे सूने जीवन में प्रेम का संचार कर। तेरी ममता की छाया मेरे सिर पर बनी रहे, मेरे घर में सदा सुख-शांति की रोशनी रहे। अंतरा 6 तेरा नाम लेकर सुबह का सूरज उगता है, नई उम्मीदों से मन फिर आगे बढ़ता है। हर दिन एक अवसर है अच्छा काम करने का, किसी रोते हुए चेहरे पर मुस्कान धरने का। माँ, मेरे भीतर ऐसी भावना भर देना, दूसरों की खुशी में खुश होने का गुण देना। जो भी मिले, उसमें संतोष करना सिखाना, मेहनत और ईमानदारी का दीप जलाना। अंतरा 7 माँ, मेरी भूलों को समझने की बुद्धि देना, गलत रास्ते से लौटने की शक्ति देना। जो टूट गए रिश्ते, उनमें संवाद जगे, नफरत की जगह फिर अपनापन जगे। मेरे घर में सम्मान और विश्वास बना रहे, बड़ों का आशीष, बच्चों का हास बना रहे। हर सुबह नई आशा लेकर आए, हर शाम मन को शांति देकर जाए। कव्वाली रंग — ताल थोड़ी तेज तेरी महिमा गाऊँ माँ, तेरी ज्योति जगाऊँ, अपने मन के आँगन में तेरा नाम सजाऊँ। जय माँ, जय माँ, स्कन्दमाता जय माँ, मेरे हृदय में सदा तेरा वास रहे माँ। तेरी ममता, तेरी छाया, तेरे नाम ने राह दिखाया। जब भी मन ने तुझको पुकारा, विश्वास ने दिया सहारा। अंतरा 8 माँ, मुझे इतना निर्मल मन प्रदान करना, किसी के प्रति दुर्भाव न मन में आने देना। जिससे भी मिलूँ, सम्मान से बात करूँ, अपने कर्मों से इंसानियत की सेवा करूँ। न किसी की मजबूरी का मजाक बनाऊँ, न किसी के आँसुओं से अपना सुख सजाऊँ। माँ, मुझे ऐसा इंसान बनाना, जो प्रेम बाँटे और प्रेम ही पाए। अंतरा 9 तेरे दरबार की कल्पना मन को भाती है, दीपों की लौ में आशा मुस्कुराती है। घंटियों की ध्वनि जब वातावरण में घुलती है, भटकी हुई सोच भी धीरे-धीरे सँभलती है। हारमोनियम की धुन में मन प्रार्थना करता है, हर स्वर तेरे चरणों में समर्पण करता है। ढोलक की थाप और तालियों की रवानी, गाती है तेरी महिमा, हे जग की महारानी। रूहानी आलाप माँऽऽ… ओ माँऽऽ… तेरी शरण में मन को आराम मिले… ओ माँऽऽ… मेरी माँऽऽ… हर दिल को प्रेम का पैगाम मिले… अंतरा 10 यदि कभी सफलता मेरे द्वार पर आए, तो मेरा मन घमंड में न भर जाए। यदि कभी असफलता मेरा मन दुखाए, तो मेरा विश्वास मुझे आगे बढ़ाए। सुख में विनम्र रहूँ, दुख में धीरज धरूँ, हर परिस्थिति में सच्चे कर्म करूँ। माँ, मेरे भीतर संतुलन बनाए रखना, मुझे मानवता का मार्ग दिखाते रहना। अंतिम मुखड़ा — ऊँचा, भावपूर्ण एकल स्वर माँ स्कन्दमाता, मेरे दिल की पुकार सुन ले, आँखों में छिपे आँसू, मेरी सरकार सुन ले। तेरे चरणों में मेरी श्रद्धा का संसार रहे, मेरे मन में सदा तेरा पावन विचार रहे। जय माँ, जय माँ, स्कन्दमाता जय माँ, तेरी ममता का जग में उजियारा रहे। जय माँ, जय माँ, जगदम्बे जय माँ, हर दिल में प्रेम और विश्वास बना रहे। समापन — धीमा हारमोनियम हे माँ स्कन्दमाता, मेरी श्रद्धा तुझे समर्पित है। मेरे शब्द तुझे समर्पित हैं, मेरा यह भाव तुझे समर्पित है। प्रस्तुति: कृष्ण गेरा। चैनल: आत्मा की आवाज़। जय माता दी।
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